Class 3
Class 4
Class 5
“कसोद: पीले फूलों से सजा, तेजी से बढ़ने वाला और उपयोगी वृक्ष।”
कसोद राजस्थान सहित भारत के कई भागों में पाया जाने वाला एक आकर्षक वृक्ष है। इसकी पहचान इसके पीले फूलों, संयुक्त पत्तियों और लंबी चपटी फलियों से आसानी से की जा सकती है। राजस्थान वन विभाग की सूची में कसोद का वानस्पतिक नाम Cassia siamea दिया गया है। इसका वर्तमान स्वीकृत नाम Senna siamea है।
The Kassod Tree, also known as Siamese Senna or Siamese Cassia, is an attractive tree recognised by its yellow flowers, compound leaves and long flat pods.
Senna siamea (Lam.) H.S.Irwin & Barneby
Synonym / पुराना नाम: Cassia siamea Lam.
Family / कुल: Fabaceae
(पुराने वर्गीकरण में Caesalpiniaceae भी लिखा मिलता है।)
हिंदी: कसोद, सीमिया
English: Kassod, Siamese Senna, Siamese Cassia
Marathi: कसोद
राजस्थान में: कसोद
अन्य नाम: Ironwood Tree, Cassod Tree
कसोद एक मध्यम से बड़ा वृक्ष है और अनुकूल परिस्थितियों में काफी ऊँचा हो सकता है।
इसकी पत्तियाँ संयुक्त (pinnate) होती हैं।
एक पत्ती में कई जोड़े छोटे, अंडाकार पर्णक होते हैं।
इसके फूल आकर्षक पीले रंग के होते हैं और गुच्छों में लगते हैं।
फूलों के बाद लंबी, चपटी और कुछ मोटी फलियाँ (pods) विकसित होती हैं।
फलियों के अंदर अनेक बीज पाए जाते हैं।
इसकी शाखाएँ अपेक्षाकृत फैली हुई होती हैं और वृक्ष घनी छाया प्रदान कर सकता है।
यह शुष्क तथा उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी उगाया जाता है और राजस्थान के वनस्पति अभिलेखों में दर्ज है।
कसोद के चमकीले पीले फूल इसकी सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक हैं। फूल शाखाओं के सिरों पर गुच्छों में दिखाई देते हैं और वृक्ष को विशेष रूप से सुंदर बना देते हैं।
Its bright yellow flowers are one of its most distinctive features and give the tree an attractive ornamental appearance.
कसोद के विभिन्न भागों, विशेषकर पत्तियों और छाल, का उल्लेख पारंपरिक चिकित्सा और लोक-उपयोगों में मिलता है। कुछ स्रोत इसके पारंपरिक उपयोगों के साथ antimicrobial, anti-inflammatory और analgesic गतिविधियों का उल्लेख करते हैं।
Different parts of Kassod, particularly its leaves and bark, have been used in traditional practices. Some sources report traditional and pharmacological interest in its antimicrobial and anti-inflammatory properties.
ध्यान दें | Note: ये पारंपरिक/अनुसंधान संबंधी जानकारी है। किसी बीमारी के उपचार के लिए इसके भागों का सेवन या औषधीय प्रयोग चिकित्सकीय विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
कसोद का उपयोग विभिन्न स्थानों पर सजावटी वृक्ष, छायादार वृक्ष और कृषि-वनीकरण (agroforestry) में किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसकी पत्तियों का उपयोग पशु-चारे तथा वृक्ष को मिट्टी सुधार से जुड़े कृषि-वनीकरण कार्यों में भी किया जाता है।
It is valued for ornamental planting, shade, agroforestry and various traditional uses. Its foliage has also been used as fodder in some agroforestry systems.
कसोद के पीले फूल परागण करने वाले कीटों के लिए संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं। इसका घना पर्णसमूह स्थानीय हरित आवरण और छाया बढ़ाने में सहायक होता है।
Its flowers can provide resources for pollinating insects, while its foliage contributes to local greenery and shade.
कसोद तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष माना जाता है और विभिन्न उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लगाया जाता है। राजस्थान में भी इसे वृक्षारोपण के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
Kassod is considered a fast-growing tree and is cultivated in tropical and subtropical regions, including parts of Rajasthan.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
कसोद की पत्तियाँ देखने में छोटी-छोटी पत्तियों के कई जोड़ों से बनी होती हैं, जबकि इसके पीले फूल गुच्छों में खिलते हैं। फूलों के बाद बनने वाली लंबी फलियाँ इसकी पहचान को और आसान बनाती हैं।
Kassod combines delicate compound foliage, bright yellow flowers and long flat pods, making it an interesting tree for botanical observation.
संयुक्त पत्तियाँ + पीले गुच्छेदार फूल + लंबी चपटी फलियाँ + फैली हुई शाखाएँ = कसोद 🌼
Compound leaves + yellow clustered flowers + long flat pods + spreading branches = Kassod 🌳
“कसोद जैसे स्थानीय रूप से उपयोगी वृक्षों को पहचानें, उनका संरक्षण करें और वृक्षारोपण में स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखें।”
“Identify and protect useful trees like Kassod, and choose trees responsibly according to local environmental conditions.”
पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ • जैव विविधता बढ़ाएँ
Plant Trees • Protect Nature • Enrich Biodiversity
“तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष, सुगंधित पत्तियाँ और विविध उपयोग।”
यूकेलिप्टस भारत में व्यापक रूप से लगाया जाने वाला तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है। इसे सामान्यतः सफेदा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी लंबी, सीधी तना-रचना, छाल और विशिष्ट सुगंध वाली पत्तियाँ इसकी प्रमुख पहचान हैं।
The Eucalyptus Tree is a fast-growing tree widely cultivated in India. It is commonly known as Safeda in many parts of the country. Its tall trunk, characteristic bark and aromatic leaves make it easy to recognise.
Eucalyptus spp.
यूकेलिप्टस की अनेक प्रजातियाँ हैं। भारत में विभिन्न प्रजातियों का वृक्षारोपण किया जाता है।
Family / कुल: Myrtaceae
हिंदी: सफेदा, यूकेलिप्टस
English: Eucalyptus
संस्कृत/आयुर्वेदिक संदर्भ: नीलगिरि
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: सफेदा, नीलगिरी
यूकेलिप्टस सामान्यतः तेजी से बढ़ने वाला सदाबहार वृक्ष है।
इसकी अनेक प्रजातियाँ बहुत ऊँची हो सकती हैं।
इसकी छाल कुछ प्रजातियों में लंबी पट्टियों के रूप में उतरती है।
पत्तियाँ प्रायः लंबी, संकरी और सुगंधित होती हैं।
पत्तियों को मसलने पर विशिष्ट सुगंध आती है।
इसके फूल सफेद, क्रीम या अन्य हल्के रंगों के हो सकते हैं और इनमें अनेक पुंकेसर दिखाई देते हैं।
इसके फल छोटे, कठोर और कप या कैप्सूल जैसे दिखाई देते हैं।
इसकी लकड़ी का उपयोग विभिन्न निर्माण एवं औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
इसकी कई प्रजातियाँ विभिन्न प्रकार की जलवायु में उगाई जाती हैं।
यूकेलिप्टस की पत्तियों में सुगंधित essential oils पाए जाते हैं। पत्तियों को मसलने पर इसकी विशिष्ट तेज सुगंध आसानी से महसूस की जा सकती है।
Eucalyptus leaves contain aromatic essential oils, giving them their characteristic fragrance when crushed.
यूकेलिप्टस की कुछ प्रजातियों की पत्तियों से प्राप्त यूकेलिप्टस तेल (Eucalyptus oil) का उपयोग पारंपरिक तथा आधुनिक उत्पादों में किया जाता है। इसका उपयोग सुगंधित उत्पादों, कुछ बाहरी उपयोग वाले उत्पादों तथा श्वसन संबंधी आराम देने वाले उत्पादों में किया जाता है।
Eucalyptus oil obtained from certain species is used in aromatic, topical and respiratory-support products.
ध्यान दें | Note: यूकेलिप्टस तेल को बिना उचित सलाह के निगलना सुरक्षित नहीं है। बच्चों में विशेष सावधानी आवश्यक है। औषधीय उपयोग के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।
यूकेलिप्टस की लकड़ी का उपयोग कागज एवं लुगदी उद्योग, ईंधन, खंभों और विभिन्न लकड़ी उत्पादों में किया जाता है। इसकी तेज वृद्धि के कारण इसे कई स्थानों पर व्यावसायिक वृक्षारोपण के लिए भी लगाया जाता है।
Eucalyptus wood is used in pulp and paper production, fuel, poles and various wood products. Its rapid growth makes several species important in commercial forestry.
यूकेलिप्टस के फूलों में अनेक पुंकेसर होते हैं और वे मधुमक्खियों तथा अन्य परागणकर्ताओं को आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि, यूकेलिप्टस की विभिन्न प्रजातियों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसके पर्यावरणीय प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं।
Eucalyptus flowers can provide resources for bees and other pollinators. However, the ecological effects of eucalyptus plantations can vary depending on the species, soil, water availability and local ecosystem.
यूकेलिप्टस को अक्सर पानी की अधिक खपत वाले वृक्ष के रूप में चर्चा की जाती है, लेकिन इसकी वास्तविक जल आवश्यकता प्रजाति, जलवायु, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए बड़े पैमाने पर रोपण करते समय स्थानीय पारिस्थितिकी और जल उपलब्धता को ध्यान में रखना आवश्यक है।
The water requirements of eucalyptus vary with species, climate, soil and local conditions. Responsible plantation planning should therefore consider local water availability and ecological conditions.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
यूकेलिप्टस की पत्तियों में पाए जाने वाले सुगंधित तेलों के कारण इसकी पत्तियों की एक अलग और आसानी से पहचानी जाने वाली खुशबू होती है। 🌿
The characteristic aroma of eucalyptus comes from the volatile oils present in its leaves.
लंबा तना + सुगंधित संकरी पत्तियाँ + विशिष्ट छाल + तेजी से वृद्धि = यूकेलिप्टस 🌳
Tall trunk + aromatic narrow leaves + distinctive bark + rapid growth = Eucalyptus 🌿
“हर वृक्ष महत्वपूर्ण है, लेकिन हर स्थान के लिए हर वृक्ष उपयुक्त नहीं होता।
वृक्षारोपण करते समय स्थानीय जलवायु, मिट्टी और जैव विविधता का ध्यान रखें।”
“Every tree matters, but not every tree is suitable for every place.
Choose trees responsibly by considering local climate, soil, water and biodiversity.”
सही वृक्ष चुनें • जिम्मेदारी से लगाएँ • प्रकृति का संतुलन बनाएँ
Choose the Right Tree • Plant Responsibly • Protect Ecological Balance
“बिल्व: औषधीय गुणों, पौष्टिक फल और भारतीय संस्कृति से जुड़ा पवित्र वृक्ष।”
बिल्व वृक्ष भारत का एक महत्वपूर्ण फलदार, औषधीय और सांस्कृतिक महत्व वाला वृक्ष है। इसका फल कठोर बाहरी आवरण वाला होता है और पकने पर इसका गूदा सुगंधित, मीठा तथा पौष्टिक होता है। बिल्व का उल्लेख भारतीय परंपरा और आयुर्वेद में विशेष रूप से मिलता है।
The Bael Tree is an important fruit-bearing tree valued for its traditional medicinal, nutritional and cultural significance. Its fruit has a hard outer shell and contains fragrant, sweet and nutritious pulp when ripe.
Aegle marmelos (L.) Corrêa
Family / कुल: Rutaceae (रूटेसी / नींबू कुल)
हिंदी: बेल, बिल्व
संस्कृत: बिल्व, श्रीफल
English: Bael / Bengal Quince / Wood Apple
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: बेल
बंगाली: বেল (बेल)
मराठी: बेल
बिल्व एक छोटा से मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है।
इसकी शाखाओं पर अक्सर काँटे पाए जाते हैं।
इसकी सबसे विशिष्ट पहचान इसकी त्रिपत्री (तीन पत्तियों वाली) पत्तियाँ हैं।
पत्तियाँ सुगंधित और हरे रंग की होती हैं।
इसके फूल छोटे, सुगंधित तथा हल्के हरे-सफेद रंग के होते हैं।
इसका फल गोल या अंडाकार होता है और इसके बाहर कठोर, लकड़ी जैसा खोल होता है।
पकने पर फल के अंदर पीले-नारंगी रंग का सुगंधित गूदा होता है।
बिल्व गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु में भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है।
बिल्व की पत्तियाँ सामान्यतः तीन पत्रकों (leaflets) से बनी होती हैं। यही इसकी पहचान की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
The leaves are typically trifoliate, consisting of three leaflets, which makes the tree easy to recognise.
बिल्व का फल पौष्टिक माना जाता है और इससे शरबत, पेय, मुरब्बा और अन्य खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। गर्मियों में बेल का शरबत एक लोकप्रिय पारंपरिक पेय है।
Bael fruit is valued as a nutritious food and is used to prepare traditional drinks, sherbet, preserves and other food products.
बिल्व के फल, पत्तियों, जड़ और छाल का उल्लेख आयुर्वेद तथा पारंपरिक चिकित्सा में मिलता है। विशेष रूप से इसके फल का उपयोग पारंपरिक रूप से पाचन तंत्र से संबंधित स्वास्थ्य उपयोगों में किया जाता रहा है।
The fruit, leaves, roots and bark of Bael have a long history of use in Ayurveda and traditional medicine, with the fruit traditionally associated with digestive health.
ध्यान दें | Note: ये पारंपरिक उपयोग हैं। किसी बीमारी के उपचार के लिए बिल्व के किसी भाग का औषधीय सेवन चिकित्सकीय विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
बिल्व वृक्ष भारतीय संस्कृति में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसकी त्रिपत्री पत्तियाँ भगवान शिव को अर्पित की जाती हैं। इसी कारण बिल्व को अनेक स्थानों पर पवित्र वृक्ष के रूप में सम्मान दिया जाता है।
The Bael holds a special place in Indian traditions. Its three-leaflet leaves are traditionally offered to Lord Shiva, giving the tree an important cultural and religious significance.
बिल्व विभिन्न प्रकार के जीवों के लिए भोजन और आश्रय उपलब्ध करा सकता है। इसके फूल परागण करने वाले कीटों को आकर्षित करते हैं और इसके फल कई जीवों के लिए भोजन का स्रोत बन सकते हैं।
Bael contributes to local biodiversity by providing food and habitat resources. Its flowers can attract pollinating insects, while its fruits may support birds and other animals.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
बिल्व का फल बाहर से बहुत कठोर दिखाई देता है, लेकिन इसके अंदर सुगंधित और स्वादिष्ट गूदा होता है। इसकी तीन पत्तियों वाली पत्ती इसे आसानी से पहचानने में मदद करती है।
The Bael fruit has a very hard outer shell, while the inside contains fragrant edible pulp. Its characteristic three-leaflet leaves are an excellent identification feature.
त्रिपत्री पत्तियाँ + काँटेदार शाखाएँ + सुगंधित फूल + कठोर गोल फल = बिल्व वृक्ष 🌿
Trifoliate leaves + thorny branches + fragrant flowers + hard round fruit = Bael Tree 🌳
“बिल्व हमारी प्राकृतिक, औषधीय और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
आइए, इसे पहचानें, संरक्षित करें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।”
“Bael is a part of our natural, medicinal and cultural heritage.
Let us identify, protect and preserve it for future generations.”
पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ • विरासत सँजोएँ
Plant Trees • Protect Nature • Preserve Our Heritage
“पीपल: विशाल छाया, समृद्ध जैव विविधता और भारतीय परंपरा का प्रतीक।”
पीपल भारत के सबसे प्रसिद्ध और दीर्घजीवी वृक्षों में से एक है। इसकी पहचान इसके हृदयाकार पत्तों और लंबी नुकीली नोक से आसानी से की जा सकती है। यह अनेक पक्षियों और जीवों के लिए भोजन एवं आश्रय प्रदान करता है।
The Peepal Tree is one of India's most well-known and long-lived trees. It is easily recognised by its distinctive heart-shaped leaves with long, tapering tips. It also supports many birds and other organisms.
Ficus religiosa L.
Family / कुल: Moraceae (मोरैसी / शहतूत कुल)
हिंदी: पीपल
संस्कृत: अश्वत्थ, पिप्पल
English: Peepal Tree / Sacred Fig
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: पीपल
पंजाबी: ਪਿੱਪਲ (पिप्पल)
मराठी: पिंपळ
पीपल एक बड़ा, दीर्घजीवी और सामान्यतः पर्णपाती या अर्ध-सदाबहार वृक्ष है।
इसकी सबसे विशिष्ट पहचान हृदयाकार पत्तियाँ हैं।
पत्तियों की नोक लंबी और पतली होती है तथा हवा चलने पर पत्तियाँ आसानी से हिलती दिखाई देती हैं।
इसका तना मजबूत और छाल धूसर-भूरे रंग की होती है।
पीपल के फूल सामान्य फूलों की तरह बाहर दिखाई नहीं देते। इसके अंजीर जैसे फल के अंदर पुष्पक्रम विकसित होता है।
इसके छोटे फल पकने पर बैंगनी या गहरे रंग के हो सकते हैं।
पीपल का संबंध अंजीर (Ficus) समूह से है और इसके फल अनेक पक्षियों के लिए भोजन का स्रोत होते हैं।
यह विभिन्न परिस्थितियों में उग सकता है और कई बार दीवारों या पुरानी इमारतों की दरारों में भी उगता दिखाई देता है।
पीपल की पत्तियाँ हृदय के आकार की होती हैं और उनकी लंबी, पतली नोक इसकी सबसे आसान पहचान है।
Peepal leaves are heart-shaped with a distinctive long, slender tip, making the tree easy to identify.
पीपल की छाल, पत्तियों, जड़ और फलों का उल्लेख पारंपरिक आयुर्वेदिक एवं लोक-चिकित्सा में मिलता है। विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग भागों का पारंपरिक उपयोग किया जाता रहा है।
The bark, leaves, roots and fruits of Peepal have been used in traditional Ayurvedic and folk practices.
ध्यान दें | Note: ये पारंपरिक उपयोग हैं। किसी रोग के उपचार के लिए पीपल के किसी भाग का सेवन या प्रयोग चिकित्सकीय विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
पीपल स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण वृक्ष है। इसके फल अनेक पक्षियों और अन्य जीवों को भोजन प्रदान करते हैं। इसकी बड़ी छतरी गर्म मौसम में छाया और आश्रय देती है।
Peepal plays an important role in local biodiversity. Its fig-like fruits provide food for birds and other animals, while its large canopy offers shade and shelter.
पीपल और उससे जुड़े परागण संबंध विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। Ficus प्रजातियों और उनके विशिष्ट परागणकर्ताओं के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक संबंध पाया जाता है।
The Ficus group has a fascinating ecological relationship with specialised pollinators, making the Peepal an interesting tree for learning about plant–insect interactions and biodiversity.
पीपल का भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विशेष स्थान है। इसे विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में सम्मान दिया जाता है। बौद्ध परंपरा में बोधि वृक्ष का संबंध भी पीपल की प्रजाति (Ficus religiosa) से है।
The Peepal has a special place in Indian cultural and spiritual traditions. The Bodhi Tree associated with the Buddha's enlightenment belongs to the same species, Ficus religiosa.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
पीपल का फल बाहर से छोटा दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह एक साइकोनियम (syconium) है, जिसके अंदर अनेक छोटे फूल विकसित होते हैं।
What appears to be a small fruit is actually a syconium, a specialised structure containing numerous tiny flowers inside.
हृदयाकार पत्तियाँ + लंबी नुकीली पत्ती की नोक + अंजीर जैसे छोटे फल + विशाल छतरी = पीपल 🌳
Heart-shaped leaves + long tapering leaf tips + fig-like fruits + broad canopy = Peepal 🌿
“पीपल हमारे प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आइए, वृक्षों को पहचानें, उनका सम्मान करें और उनका संरक्षण करें।”
“Peepal is an important part of our natural and cultural heritage.
Let us identify, respect and protect our trees.”
पेड़ लगाएँ • जैव विविधता बचाएँ • प्रकृति से जुड़ें
Plant Trees • Protect Biodiversity • Connect with Nature
“अमरूद: स्वादिष्ट फल, हरी पत्तियाँ और प्रकृति का पौष्टिक उपहार।”
अमरूद भारत में बहुत लोकप्रिय फलदार वृक्ष है। यह छोटे से मध्यम आकार का वृक्ष होता है और गर्म तथा उष्णकटिबंधीय जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है। इसके स्वादिष्ट फल विटामिन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
The Guava Tree is one of the most popular fruit trees in India. It is a small to medium-sized tree that grows well in warm and tropical climates. Its delicious fruits are valued for their nutritional content.
Psidium guajava L.
Family / कुल: Myrtaceae (मर्टेसी / जामुन कुल)
हिंदी: अमरूद, अमरूत
संस्कृत: दृढ़बीज, अमृतफल
English: Guava
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: अमरूद
बंगाली: পেয়ারা (पेयारा)
मराठी: पेरू
अमरूद एक छोटा से मध्यम आकार का सदाबहार या अर्ध-सदाबहार वृक्ष है।
इसका तना अक्सर चिकनी, हल्के भूरे या हरे-भूरे रंग की छाल वाला होता है, जो कुछ स्थानों पर परतों के रूप में छिल सकती है।
इसकी पत्तियाँ सरल, अंडाकार और स्पष्ट शिराओं वाली होती हैं।
पत्तियों को मसलने पर उनमें विशिष्ट सुगंध महसूस हो सकती है।
इसके फूल छोटे, सफेद और आकर्षक होते हैं।
फूलों में अनेक सफेद पुंकेसर दिखाई देते हैं।
इसके फल गोल या अंडाकार हो सकते हैं।
फल की बाहरी त्वचा हरी होती है और पकने पर पीली-हरी या पीली हो सकती है।
फल का गूदा सफेद, क्रीम या गुलाबी रंग का हो सकता है और इसमें अनेक छोटे बीज होते हैं।
अमरूद को बीजों के साथ-साथ कलम और अन्य वनस्पतिक विधियों से भी उगाया जाता है।
अमरूद एक पौष्टिक फल है और इसमें विटामिन C, आहार फाइबर तथा विभिन्न विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। इसे ताजा फल के रूप में खाने के साथ-साथ जूस, जैम, जेली और अन्य खाद्य पदार्थों में भी उपयोग किया जाता है।
Guava is a nutritious fruit containing vitamin C, dietary fibre and several vitamins and minerals. It is enjoyed fresh and is also used to prepare juices, jams, jellies and other food products.
अमरूद के फल, पत्तियों और छाल का उल्लेख विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और लोक-उपयोगों में मिलता है। विशेष रूप से अमरूद की पत्तियों का पारंपरिक रूप से कुछ पाचन संबंधी समस्याओं के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
The fruit, leaves and bark of the guava tree have been used in various traditional and folk practices. Guava fruit itself is also an important source of nutrients.
ध्यान दें | Note: पारंपरिक उपयोगों को आधुनिक चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।
अमरूद के फूल विभिन्न परागणकर्ताओं, विशेषकर मधुमक्खियों और अन्य कीटों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसके फल पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी भोजन का स्रोत बनते हैं।
Guava flowers can attract pollinators such as bees and other insects, while its fruits may provide food for birds and other animals.
🍈 ताजे फल के रूप में
🥤 जूस और शेक बनाने में
🍯 जैम और जेली बनाने में
🍬 अमरूद की कैंडी एवं अन्य खाद्य पदार्थों में
🌳 घरेलू बगीचों और विद्यालय परिसरों में फलदार वृक्ष के रूप में
🌿 पारंपरिक उपयोगों में पत्तियों एवं अन्य भागों का प्रयोग
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
अमरूद की पत्तियों पर शिराओं का जाल बहुत स्पष्ट दिखाई देता है। यही विशेषता इसकी पहचान में मदद करती है। इसके फूलों में अनेक सफेद पुंकेसर होते हैं, जो फूल को आकर्षक रूप देते हैं।
The prominent veins on guava leaves are a useful identification feature. Its flowers are characterised by numerous white stamens.
अंडाकार शिरायुक्त पत्तियाँ + सफेद फूल + गोल/अंडाकार फल + सुगंधित पत्तियाँ = अमरूद 🍈
Oval leaves with prominent veins + white flowers + round/oval fruit + aromatic foliage = Guava 🌿
“फलदार वृक्ष लगाएँ, पौष्टिक फल पाएँ और प्रकृति को समृद्ध बनाएँ।”
“Plant fruit trees, enjoy nutritious fruits and enrich nature.”
पेड़ लगाएँ • फलदार वृक्ष बचाएँ • स्वस्थ जीवन अपनाएँ
Plant Trees • Protect Fruit Trees • Choose a Healthy Life
“अशोक: सुंदरता, औषधीय परंपरा और भारतीय संस्कृति से जुड़ा वृक्ष।”
अशोक भारत का एक प्रसिद्ध और सुंदर सदाबहार वृक्ष है, जिसका भारतीय संस्कृति और पारंपरिक आयुर्वेद में विशेष महत्व है। इसके आकर्षक फूल और घने पत्ते इसे उद्यानों तथा मंदिरों के आसपास लगाए जाने वाला लोकप्रिय वृक्ष बनाते हैं।
The Ashoka Tree is a beautiful evergreen tree deeply associated with Indian culture and traditional Ayurveda. Its attractive flowers and dense foliage make it a valued ornamental tree.
महत्वपूर्ण पहचान: यहाँ “अशोक” से आशय सच्चे अशोक वृक्ष (Saraca asoca) से है। इसे अक्सर सजावटी False Ashoka (Polyalthia longifolia) के साथ भ्रमित किया जाता है।
Saraca asoca (Roxb.) Willd.
Family / कुल: Fabaceae (मटर कुल)
हिंदी: अशोक, सीता-अशोक
संस्कृत: अशोक, हेमपुष्प
English: Ashoka Tree
वैज्ञानिक नाम: Saraca asoca
स्थानीय प्रयोग: अशोक
अशोक एक सदाबहार, मध्यम आकार का वृक्ष है।
इसकी शाखाएँ घनी होती हैं और यह सुंदर, घना आकार बनाता है।
इसकी नई पत्तियाँ शुरुआत में तांबे या लाल-भूरे रंग की दिखाई दे सकती हैं और बाद में हरी हो जाती हैं।
पत्तियाँ लंबी, संयुक्त और चमकदार होती हैं।
इसके फूल गुच्छों में लगते हैं और पीले, नारंगी से लाल रंग में बदलते दिखाई दे सकते हैं।
फूलों में सामान्यतः पंखुड़ियाँ स्पष्ट नहीं होतीं, बल्कि रंगीन पुंकेसर और पुष्पांग आकर्षक दिखाई देते हैं।
इसके फल चपटे, लंबे फलीनुमा (pods) होते हैं।
यह गर्म और आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है।
अशोक के फूल इसकी सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक हैं। फूलों का रंग समय के साथ पीले से नारंगी और लाल रंग की ओर बदल सकता है, जिससे एक ही वृक्ष पर विभिन्न रंगों के फूल दिखाई दे सकते हैं।
The flowers are one of the most distinctive features of the Ashoka. Their colour may change from yellow to orange and reddish shades as they mature, creating a beautiful display.
अशोक की छाल और अन्य भागों का उपयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। विशेष रूप से इसकी छाल से बने पारंपरिक तैयारियों का उल्लेख महिला स्वास्थ्य से संबंधित आयुर्वेदिक उपयोगों में मिलता है।
The bark and other parts of Saraca asoca have a long history of use in traditional Ayurvedic preparations, particularly in traditional women's health practices.
ध्यान दें | Note: यह जानकारी पारंपरिक उपयोगों पर आधारित है। किसी औषधीय उद्देश्य के लिए अशोक का सेवन या उपयोग चिकित्सकीय विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
अशोक का घना पर्णसमूह स्थानीय हरित आवरण बढ़ाने में योगदान देता है। इसके फूल परागण करने वाले कीटों के लिए संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं और इसका घना स्वरूप छोटे जीवों के लिए आश्रय प्रदान कर सकता है।
Its dense foliage contributes to green cover, while its flowers can provide resources for pollinating insects and other organisms.
अशोक वृक्ष भारतीय साहित्य, कला और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इसका उल्लेख प्राचीन भारतीय साहित्य में मिलता है और इसे सुख, सौंदर्य तथा शोक से मुक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
The Ashoka has a special place in Indian literature, art and cultural traditions and is traditionally associated with beauty, happiness and freedom from sorrow.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
“अशोक” शब्द का अर्थ ही है “शोक से रहित”। भारतीय परंपरा में इसे शुभता और प्रसन्नता से जोड़ा गया है। 🌺
The name Ashoka literally conveys the idea of being free from sorrow, giving the tree a special cultural significance.
लंबी संयुक्त पत्तियाँ + रंग बदलते गुच्छेदार फूल + सदाबहार प्रकृति = अशोक 🌿
Long compound leaves + clustered flowers changing from yellow to orange/red + evergreen habit = True Ashoka 🌺
अशोक (Saraca asoca): चौड़ी पत्तियाँ, गुच्छों में रंगीन फूल और पारंपरिक औषधीय महत्व।
फॉल्स अशोक (Polyalthia longifolia): लंबा, पतला और शंक्वाकार वृक्ष, जिसकी पत्तियाँ लंबी एवं लहरदार होती हैं। इसे अक्सर सड़कों और परिसरों में सजावटी वृक्ष के रूप में लगाया जाता है।
“अशोक केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। आइए, इसे पहचानें, संरक्षित करें और अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ।”
“The Ashoka is not merely a beautiful tree; it is a part of our natural and cultural heritage. Let us identify, protect and grow more trees.”
पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ • विरासत सँजोएँ
Plant Trees • Protect Nature • Preserve Our Heritage
“जब गुलमोहर खिलता है, प्रकृति रंगों की एक शानदार चित्रकारी कर देती है।”
गुलमोहर भारत में लगाए जाने वाले सबसे आकर्षक फूलदार वृक्षों में से एक है। गर्मियों में इसकी शाखाएँ चमकीले लाल, नारंगी या लाल-पीले फूलों से भर जाती हैं। इसकी फैली हुई छतरी इसे छायादार और सुंदर वृक्ष बनाती है।
The Gulmohar Tree is one of the most beautiful flowering trees commonly grown in India. During the warmer months, its spreading branches are covered with striking red, orange and yellow flowers, creating a spectacular display.
Delonix regia
Family / कुल: Fabaceae (फैबेसी / मटर कुल)
हिंदी: गुलमोहर
संस्कृत: कृष्णचूड़ा
English: Royal Poinciana / Flame Tree / Flamboyant Tree
बंगाली: कृष्णचूड़ा
मराठी: गुलमोहर
स्थानीय प्रयोग: गुलमोहर
गुलमोहर एक फूलदार, तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है।
इसकी शाखाएँ चारों ओर फैलकर एक चौड़ी और छायादार छतरी बनाती हैं।
इसकी पत्तियाँ बहुत महीन और द्विपक्षीय संयुक्त (bipinnate) होती हैं।
इसके फूल बड़े, आकर्षक और सामान्यतः लाल-नारंगी रंग के होते हैं।
फूलों की एक पंखुड़ी पर अक्सर पीले या सफेद रंग के निशान दिखाई देते हैं।
इसके फल लंबी, चपटी और कठोर फलियों (pods) के रूप में होते हैं।
गर्मियों में इसका फूलना इसे अन्य वृक्षों से आसानी से पहचानने योग्य बनाता है।
इसे सड़कों, पार्कों, विद्यालय परिसरों और उद्यानों में सजावटी वृक्ष के रूप में लगाया जाता है।
गुलमोहर के फूल इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। खिलने के मौसम में पूरा वृक्ष लाल-नारंगी फूलों से ढक जाता है और दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पेड़ पर आग की लपटें चमक रही हों।
Its spectacular flowers are the main attraction of the Gulmohar. When in full bloom, the tree can appear like a flame of colour, which explains its popular name Flame Tree.
गुलमोहर के विभिन्न भागों का उल्लेख पारंपरिक चिकित्सा और लोक-उपयोगों में मिलता है। इसकी पत्तियों, फूलों, छाल और बीजों से संबंधित पारंपरिक उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
Different parts of Gulmohar have been used in traditional and folk practices. However, scientific evidence for specific medicinal treatments is limited, and the plant should not be used as a home remedy without appropriate expert guidance.
गुलमोहर शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने और छाया प्रदान करने में उपयोगी है। इसके फूल विभिन्न परागणकर्ताओं और कीटों को आकर्षित कर सकते हैं।
Gulmohar contributes to urban greenery and shade. Its colourful flowers can also provide resources for pollinating insects and other small organisms.
🌳 सजावटी वृक्ष के रूप में
🏫 विद्यालयों और संस्थानों के परिसर में
🛣️ सड़क किनारे वृक्षारोपण में
🌿 पार्कों और उद्यानों में
☀️ छाया प्रदान करने के लिए
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
गुलमोहर की पत्तियाँ देखने में फर्न की पत्तियों जैसी बहुत महीन होती हैं, जबकि इसके बड़े लाल-नारंगी फूल पूरे वृक्ष को एक अलग ही रूप देते हैं।
Its delicate, fern-like leaves and spectacular flowers create a fascinating contrast, making Gulmohar one of the most easily recognisable ornamental trees.
महीन द्विपक्षीय संयुक्त पत्तियाँ + लाल-नारंगी फूल + लंबी चपटी फलियाँ + फैली हुई छतरी = गुलमोहर 🌺
Fine bipinnate leaves + bright flowers + long flat pods + spreading canopy = Gulmohar 🌳
“गुलमोहर की सुंदरता हमें प्रकृति के रंगों से जोड़ती है।
आइए, वृक्ष लगाएँ और अपने आसपास को हराभरा बनाएँ।”
“The beauty of Gulmohar connects us with the colours of nature.
Let us plant trees and make our surroundings greener.”
पेड़ लगाएँ • फूलों को बचाएँ • जैव विविधता बढ़ाएँ
Plant Trees • Protect Nature • Enrich Biodiversity
“नीम: प्रकृति का औषधीय उपहार और हरियाली का प्रहरी।”
नीम भारत के सबसे प्रसिद्ध और उपयोगी वृक्षों में से एक है। यह गर्म और शुष्क परिस्थितियों में भी अच्छी तरह विकसित हो सकता है और भारत के अनेक भागों में सड़क किनारे, खेतों, विद्यालय परिसरों और घरों के आसपास लगाया जाता है।
The Neem Tree is one of the most well-known and useful trees of India. It is well adapted to warm conditions and is widely grown around roadsides, farms, homes and school campuses.
Azadirachta indica A.Juss.
Family / कुल: Meliaceae (महोगनी कुल)
हिंदी: नीम
संस्कृत: निम्ब, अरिष्ट
English: Neem / Indian Lilac / Margosa
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: नीम
नीम सामान्यतः एक सदाबहार वृक्ष है और इसकी छतरी फैली हुई होती है।
इसका तना सीधा तथा छाल भूरे रंग की और खुरदरी होती है।
इसकी पत्तियाँ संयुक्त (pinnate) होती हैं और पत्तियों के किनारे दाँतेदार होते हैं।
इसके छोटे, सुगंधित सफेद फूल गुच्छों में लगते हैं।
इसके फल छोटे, अंडाकार और पकने पर पीले हो जाते हैं।
नीम की वृद्धि अपेक्षाकृत तेज होती है और यह गर्म तथा अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त वृक्ष है।
इसके बीजों से प्राप्त नीम का तेल अनेक पारंपरिक और कृषि संबंधी उपयोगों में आता है।
नीम में पाया जाने वाला अज़ाडिरैक्टिन (Azadirachtin) एक प्राकृतिक कीट-प्रतिरोधी यौगिक है, जिसका उपयोग जैविक कीटनाशी उत्पादों में किया जाता है।
नीम के विभिन्न भागों, जैसे पत्तियाँ, छाल, बीज और तेल, का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। Kew के अनुसार नीम का उपयोग औषधीय तथा अन्य पारंपरिक उपयोगों में दर्ज है।
Neem has a long history of use in traditional medicine, with different parts of the plant being used in traditional preparations.
ध्यान दें | Note: पारंपरिक औषधीय उपयोगों को आधुनिक चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी औषधीय उपयोग के लिए विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।
नीम की एक विशेष पहचान इसका प्राकृतिक कीट-प्रतिरोधी गुण है। इसके बीजों में पाया जाने वाला अज़ाडिरैक्टिन कीटों के भोजन एवं वृद्धि को प्रभावित करता है। इसी कारण नीम आधारित उत्पादों का कृषि में कीट प्रबंधन के लिए उपयोग किया जाता है।
Neem is also valued for its natural insect-repellent properties. Azadirachtin obtained from neem is widely used in insect-management products.
नीम शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने में उपयोगी है। इसकी घनी छतरी छाया प्रदान करती है और यह अनेक स्थानों पर वृक्षारोपण के लिए उपयोग किया जाता है। इसके फूल और फल स्थानीय जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।
Neem contributes to green cover and local biodiversity and is widely planted in gardens, roadsides and other landscapes.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
नीम के बीजों से प्राप्त अज़ाडिरैक्टिन प्राकृतिक कीट-प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण नीम को कृषि में एक उपयोगी प्राकृतिक संसाधन माना जाता है। 🌱🐞
संयुक्त दाँतेदार पत्तियाँ + सफेद फूल + पीले फल + विशिष्ट उपयोग = नीम 🌿
Pinnate serrated leaves + white flowers + yellow fruits + versatile uses = Neem 🌿
“नीम को जानें, प्रकृति को समझें और हरित भविष्य के लिए वृक्षों की रक्षा करें।”
“Learn about Neem, understand nature and protect trees for a greener future.”
पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ • स्वस्थ पर्यावरण बनाएँ
Plant Trees • Protect Nature • Build a Healthy Environment
“मजबूती, उपयोगिता और हरियाली का सुंदर संगम।”
शीशम भारत में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्णपाती वृक्ष है। यह अपनी मजबूत और टिकाऊ लकड़ी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह सड़क किनारे, खेतों, नहरों और वन क्षेत्रों में आसानी से देखा जा सकता है।
The Shisham Tree is an important deciduous tree found widely in India. It is especially valued for its strong, durable and high-quality wood and is commonly grown along roadsides, agricultural fields, canals and in forest areas.
Dalbergia sissoo
Family: Fabaceae
हिंदी: शीशम
संस्कृत: शिंशपा
English: Indian Rosewood / North Indian Rosewood
राजस्थानी/स्थानीय नाम: शीशम
शीशम एक मध्यम से बड़ा पर्णपाती वृक्ष है।
इसका तना सीधा और छाल भूरे-भूरे रंग की होती है।
इसकी पत्तियाँ संयुक्त (compound) होती हैं और इनमें कई छोटे पत्ते लगे होते हैं।
फूल छोटे, हल्के पीले या सफेद रंग के तथा गुच्छों में लगते हैं।
इसके फल चपटे, पतले फलीनुमा (pods) होते हैं।
यह तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है और विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उग सकता है।
इसकी लकड़ी बहुत मजबूत, कठोर और टिकाऊ होती है।
शीशम की लकड़ी से फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियाँ तथा सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
शीशम की छाल, पत्तियों और अन्य भागों का उल्लेख पारंपरिक चिकित्सा एवं लोक-चिकित्सा में मिलता है। इनका उपयोग पारंपरिक रूप से कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं तथा अन्य स्वास्थ्य उपयोगों के लिए किया जाता रहा है।
The bark, leaves and other parts of Shisham have been mentioned in traditional and folk medicinal practices. Such traditional uses should not be considered a substitute for professional medical advice.
शीशम मिट्टी को स्थिर रखने और हरित आवरण बढ़ाने में सहायक वृक्ष है। इसकी छाया और शाखाएँ विभिन्न पक्षियों एवं छोटे जीवों को आश्रय प्रदान करती हैं। यह कृषि क्षेत्रों और सड़क किनारे वृक्षारोपण के लिए भी उपयोगी है।
Shisham contributes to green cover, soil stability and local biodiversity. Its branches and foliage provide shelter for birds and other small organisms.
शीशम की लकड़ी अपनी मजबूती, सुंदर बनावट और टिकाऊपन के कारण बहुत मूल्यवान मानी जाती है। इसका उपयोग फर्नीचर, नक्काशी, दरवाजे, खिड़कियाँ और अन्य लकड़ी के उत्पादों में किया जाता है।
Its durable and attractive wood makes Shisham an economically important tree, particularly for furniture and woodworking.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
शीशम की लकड़ी की प्राकृतिक बनावट और मजबूती के कारण यह भारतीय फर्नीचर निर्माण में लंबे समय से लोकप्रिय रही है।
Shisham is widely known for its beautiful wood grain and durability, making it one of the most valued timber trees of northern India.
संयुक्त पत्तियाँ + छोटे गुच्छेदार फूल + चपटी फलियाँ + मजबूत लकड़ी = शीशम 🌿
Compound leaves + small clustered flowers + flat pods + strong timber = Shisham 🌳
“वृक्ष हमारी संपदा हैं।
उन्हें लगाएँ, सँजोएँ और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।”
“Trees are our natural wealth.
Plant them, care for them and protect them for future generations.”
पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ • भविष्य सँवारें
Plant Trees • Protect Nature • Secure the Future
“एक वृक्ष, अनेक जड़ें, अनगिनत जीवनों का आश्रय।”
बरगद भारत के सबसे विशाल, दीर्घजीवी और विशिष्ट वृक्षों में से एक है। इसकी शाखाओं से निकलने वाली हवाई जड़ें जमीन तक पहुँचकर नए तनों का रूप ले लेती हैं। इसी कारण एक अकेला बरगद समय के साथ एक छोटे-से वन जैसा दिखाई दे सकता है।
The Banyan Tree is one of India's most magnificent and long-lived trees. Its branches produce aerial roots that grow downward and develop into supporting trunks. Over time, a single banyan can spread across a very large area and provide shelter to numerous living organisms.
Ficus benghalensis
Family: Moraceae
हिंदी: बरगद, वट वृक्ष
संस्कृत: वट, न्यग्रोध
English: Banyan Tree
राजस्थानी/स्थानीय प्रयोग: बरगद, बड़
यह एक विशाल और सदाबहार वृक्ष है।
इसकी सबसे विशिष्ट पहचान हवाई जड़ें (Aerial Roots) हैं।
हवाई जड़ें शाखाओं से नीचे की ओर बढ़कर मिट्टी में पहुँचती हैं और मजबूत तनों में बदल जाती हैं।
इसका तना और शाखाएँ बहुत बड़े क्षेत्र में फैल सकती हैं।
इसकी पत्तियाँ बड़ी, मोटी और चमकदार हरी होती हैं।
इसके छोटे फल अंजीर जैसे (fig-like) होते हैं।
बरगद अनेक पक्षियों, कीटों और छोटे जीवों को भोजन तथा आश्रय प्रदान करता है।
यह गर्म जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है और लंबे समय तक जीवित रह सकता है।
बरगद की छाल, जड़, पत्तियाँ और दूधिया रस (latex) का उल्लेख पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों में मिलता है। विभिन्न भागों का उपयोग पारंपरिक रूप से त्वचा तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है।
The bark, roots, leaves and latex of the banyan tree have been traditionally used in Ayurvedic and folk practices. These traditional uses should not be considered a substitute for professional medical advice.
बरगद का विशाल फैलाव अनेक जीवों के लिए महत्वपूर्ण habitat प्रदान करता है। इसके फल पक्षियों और अन्य जीवों के भोजन का स्रोत बनते हैं तथा इसकी घनी छाया गर्म मौसम में आश्रय देती है।
Its large canopy provides shade, shelter and habitat for birds, insects and other organisms, making it an important part of local biodiversity.
क्या आप जानते हैं? | Did You Know?
बरगद की हवाई जड़ें जब जमीन में पहुँचती हैं, तो वे नए तनों की तरह मजबूत हो सकती हैं। इसी विशेषता के कारण एक बरगद का पेड़ बहुत बड़े क्षेत्र में फैल सकता है।
The Banyan is the National Tree of India, symbolising strength, longevity and the interconnectedness of life.
“बरगद केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि अनेक जीवों का घर है।
आइए, पेड़ों को जानें, उनसे सीखें और उनका संरक्षण करें।”
“A tree is more than a plant; it is a home for countless forms of life.
Let us learn about trees, protect them and grow more of them.”
पेड़ बचाएँ • पेड़ लगाएँ • प्रकृति बचाएँ
Save Trees • Plant Trees • Protect Nature
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AC-Revised-Chapter 21-VVN-28.12.16
AC-Revised-Chapter-17
KVS Accounts Code Draft Copy 12.11.2014
AC-Amendment-Chapter 21-20-11-13
AC-Amendment-Chapter 21-20-11-13
AC-Amendment-Article-175-n-176-04-10-13
AC-Amenment-Article-202-n-203-Chapter-21-25-10-2011
AC-Amendment-Article-67A-16-02-2010
AC-Amendment-Article-187-26-08-2009
AC-Amendment-in-Article-202-30-01-2009