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Tuesday, September 8, 2020

कक्षा - 5 हिन्दी - पाठ - 2 - फ़सलों का त्यौंहार - सारांश

फसलें का त्योहार Summary Class 5 Hindi

फसलें का त्योहार पाठ का सारांश

जाड़ा का मौसम है। दस दिनों से सूरज नहीं उगा है। हम लोग सूरज के इंतजार में हैं। रजाई से निकलने की हिम्मत नहीं हो रही। लेकिन खिचड़ी (मकर संक्रांति) का त्योहार आ गया है। अतः जाड़ा के बावजूद हम सभी नहा-धोकर एक कमरे में इकट्ठा हो गए। दादा, चाचा और पापा ने सफेद चकाचक माँड़ लगी धोती और कुर्ता पहना हुआ है। सामने मचिया पर खादी की सफेद साड़ी पहने हुए दादी बैठी थीं। उनके बाल धुलने के बाद सफेद सेमल की रुई जैसे हो गए हैं। उनके सामने केले के कुछ पत्ते कतार में रखे हैं जिसपर तिल, मिट्ठा (गुड़), चावल आदि रखे हुए हैं। दादी ने हम सबसे इन चीजों को बारी-बारी से छूने और प्रणाम करने के लिए कहा। बाद में इन्हें दान दे दिया गया।

खिचड़ी के दिन चूड़ा-दही और खिचड़ी खाने का रिवाज है। किन्तु अप्पी दिदिया को दोनों में से कोई चीज पसंद नहीं है। फिर भी उन्हें दोनों चीजें खानी होंगी क्योंकि आज खिचड़ी का त्योहार है। इस दिन तिल, गुड़ और चीनी के तिलकुट भी खाए जाते हैं जो बड़े स्वादिष्ट लगते हैं।

जनवरी माह के मध्य में भारत के लगभग सभी प्रांतों में फसलों से जुड़ा कोई-न-कोई त्योहार मनाया जाता है। सभी प्रांतों और इलाकों का अपना रंग और अपना ढंग नजर आता है। इस दिन सब लोग अच्छी पैदावार की उम्मीद और फसलों के घर में आने की खुशी का इजहार करते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश में मकर संक्रांति या तिल संक्रांति, असम में बीहू, केरल में ओणम, तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, झारखंड मे सरहुल, गुजरात में पतंग का पर्व सभी खेती और फसलों से जुड़े त्योहार हैं। इन्हें जनवरी से मध्य अप्रैल तक अलग-अलग समय मनाया जाता है।

झारखंड में सरहुल काफी धूमधाम से मनाया जाता है। अलग-अलग जनजातियाँ इसे अलग-अलग समय में मनाती हैं। इस दिन ‘साल के पेड़ की पूजा की जाती है। इसी समय से मौसम बहुत खुशनुमा हो जाता है। इसीदिन से वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। धान की भी पूजा की जाती है। पूजा किया हुआ आशीर्वादी धान अगली फसल में बोया जाता है।

तमिलनाडु में फसलों से जुड़ा त्योहार ‘पोंगल’ है। इसदिन खरीफ की फसलें चावल, अरहर, मसूर आदि केटकर घरों में पहुँचती हैं और लोग नए धान कूटकर चावल निकालते हैं। हर घर में मिट्टी का नया मटका लाया जाता है। इसमें नए चावल, दूध और गुड़ डालकर उसे पकने के लिए धूप में रख देते हैं। जैसे ही दूध में उफान आता है और दूध-चावल मटके से बाहर गिरने लगता है तो “पोंगला-पोंगल, पोंगला-पोंगल” के स्वर गूंजने लगते हैं।”


कक्षा - 5 हिन्दी पाठ - 1 राख की रस्सी

 


राख की रस्सी Summary Class 5 Hindi

रखा की रस्सी पाठ का सारांश

तिब्बत के बत्तीसवें राजा सौनगवसैन गांपो के मंत्री का नाम लोनपोगार था। लोनपोगार अपनी चालाकी और हाजिरजवाबी के लिए प्रसिद्ध थे। लेकिन उनका बेटा ठीक उनके विपरीत था। वह इतना भोला था कि लोनपोगार काफी चिंतित हो उठे। वे चाहते थे कि उनका बेटा उनकी तरह होशियार हो। एक दिन उन्होंने अपने बेटे को सौ भेड़ें देकर शहर जाने को कहा। साथ में उन्होंने हिदायत दी कि वह इन्हें मारे या बेचे नहीं बल्कि इन्हें सौ जौ के बोरों के साथ वापस लाए।

बेटा शहर पहुँच गया। वह बहुत चिंतित था क्योंकि उसके पास सौ बोरे जौ खरीदने के लिए रुपये नहीं थे। अचानक उसके सामने एक लड़की आकर खड़ी हो गई। जब उसने उसकी चिंता का कारण पूछा तो उसने अपना हाल उससे कह सुनाय या। लडकी झेशियार थी। उसने भेड़ों के बाल उतारकर बाजार में बेच दिए और उससे मिले रुपयों से सौ बोरे जौ खरीद कर उसे वापस घर भेज दिया। बेटे को लगा कि पिताजी बहुत खुश होंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

दूसरे दिन लोनपोगार ने अपने बेटे को फिर शहर भेज दिया उन्हीं भेड़ों के साथ। उन्होंने बेटे से कहा कि भेड़ों के बाल उतारकर बेचना उन्हें पसंद नहीं आया। अतः वह दोबारा ऐसा काम नहीं करेगा। लेकिन भेड़ों के साथ सौ बोरे जौ अवश्य लाएगा। क बार फिर निराश लोनपोगार का बेटा शहर पहुँचा। वह लड़की उसे फिर मिली। उसने फिर अपनी समस्या उसे सुनाई। इस बार लड़की ने भेड़ों के सींग काटकर उन्हें बाजार में बेच दिया और उनसे मिले रुपयों से सौ बोरे जौ खरीद उसे घर वापस भेज दिया।

बेटे ने खुशी में अपने पिता से सारी कहानी कह दिया। सुनकर लोनपोगार बोले, “उस लड़की से कहो कि हमें नौ हाथ लंबी राख की रस्सी बनाकर दे।” उनके बेटे ने लड़की के पास जाकर पिता का संदेश सुनाया। लड़की एक शर्त पर रस्सी बनाने को तैयार थी। शर्त था कि उसके पिता उस रस्सी को गले में पहनें। लोनपोगार ने सोचा ऐसी रस्सी बनाना ही संभव नहीं है। इसलिए लड़की की शर्त स्वीकार कर ली।

अगले दिन लड़की ने नौ हाथ की रस्सी लेकर उसे पत्थर की सिल पर रखकर जला दिया। रस्सी के जलने के बाद उसी के आकार की राख बच गई। लड़की उसे सिल समेत लोनपोगार के पास ले गई और उसे पहनने को कहा। लोनपोगार राख की रस्सी देखकर दंग रह गए। लड़की की समझदारी और सूझबूझ से वे काफी प्रभावित हुए और उससे अपने बेटे की शादी करा दिए।

शब्दार्थः हाजिरजवाबी-तपाक से जवाब देना। मशहूर-प्रसिद्ध। चैन-शांति से। रवाना किया-भेजा। आपबीती-अपने ऊपर घटित। यकीन-विश्वास। मंजूर-स्वीकार । चकित रह गए-हैरान हुए। मुश्किल-कठिन। आँवाए-बिताए, बबदि किए। धूमधाम-खूब अच्छी तरह से।।